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Showing posts from November, 2020

डीआरडीओ ने इंसानी सैनिकों की तरह रोबोट सोल्जर का किया निर्माण

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                   ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  डीआरडीओ ने इंसानी सैनिकों की तरह रोबोट सोल्जर का किया निर्माण डीआरडीओ का स्पेशल प्रोजेक्ट भारत सरकार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर विषम परिस्थितियों में इंसानी नुकसान को ‘शून्य’ तक लाने में जुटी है । इसके लिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानि डीआरडीओ एक स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। उनमें से एक प्रोजेक्ट ‘रोबोट सोल्जर’ है। जी हाँ डीआरडीओ स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत रोबोट सोल्जर तैयार कर रहा है। जिसका मॉडल डिफेंस एक्सपो में लगाया गया है। इंसानों की शक्ल में ये रोबोट एक सोल्जर की तरह ऑपरेशंस में हिस्सा लेंगे। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पांच फरवरी से चल रहे 11वें डिफेंस एक्सपो-2020 में भारत की सामरिक शक्ति का प्रदर्शन हो रहा है। यहां मेले में ऐसे-ऐसे आत्याधुनिक हथियार हैं, जो कई किमी दूर बैठे दुश्मनों को धूल चटा सकते हैं। जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के जवानों के बलिदान म...

चमगादड़ जैसा ड्रोन.वजन मात्र 93 ग्राम.जो करेगा फसलों की सुरक्षा

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                ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  चमगादड़ जैसा ड्रोन.वजन मात्र 93 ग्राम.जो करेगा फसलों की सुरक्षा चमगादड़ जैसा ड्रोन.वजन मात्र 93 ग्राम.जो करेगा फसलों की सुरक्षा हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर से प्रेरित होकर ड्रोन को बनाया गया है. बोस्टन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने चमगादड़ जैसा ड्रोन वजन मात्र 93 ग्राम को बनाया है. जो चमगादड़ से मिलता जुलता है. यह अल्ट्रा लाइट ड्रोन उड़ने वाले पक्षी के तरह अपने पंखों फड़फड़ाता है. यह ड्रोन मौसमका हाल बतायेगा.जो करेगा फसलों की सुरक्षा. यह आपातकालीन परिस्थिति में सर्च,रेस्क्यू और निगरानी करने में भी काम आ सकता है. चमगादड़ जैसा ड्रोन उड़ता हुआ robot मानव रहित विमान को ड्रोन (Drone) कहा जाता है. विविध आकार-प्रकार और विविध कार्यों के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. इसे सुदूर स्थान से नियंत्रित किया जाता है. वास्तव में यह एक उड़ता हुआ robot ही है. जिसे इंसान विविध कार्यों के लिए remote control द्वारा इसे नियंत्रित करता है. ड्रोन की विशेषतायें चमगादड़ जैसा ड्रोन की इस विशेषता के कारण ही यह टोही विमान के रूप में अत्...

बेल के पत्ते में छिपा है जनसंख्या नियंत्रण का राज, यह एंटी ऑक्सीडेंट हैं

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  ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।   बेल के पत्ते में छिपा है जनसंख्या नियंत्रण का राज भागलपुर .अगर आप बिना किसी परेशानी के बच्चा नहीं चाहते हैं तो आपको बेल के पत्ते (वुड एपल) का नियमित सेवन करना होगा. जब तक आप बेल के पत्ते का सेवन करेंगे, तब तक बच्चा नहीं होगा. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के जंतु विज्ञान विभाग के वरीय शिक्षक प्रो. विभूति नारायण सिंह ने बेल के पत्ते पर शोध किया है. प्रो. सिंह का कहना है कि पुरुष जब तक बेल के पत्ते के चूर्ण का सेवन करेगा तब तक बच्चा नहीं होगा. जब बच्चे की इच्छा हो तब चूर्ण का सेवन करना बंद कर दे.यह शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है. शोध को मान्यता भी मिल गई है. प्रो. सिंह के साथ राजेश कुमार ने भी काम किया है.अभी तक पुरुष जनसंख्या नियंत्रण के लिए कंडोम या फिर नसबंदी का सहारा लेते रहे हैं. बेल के पत्ते के चूर्ण का घोल बनाकर चूहों पर किया सफल प्रयोग प्रोफेसर सिंह ने 12 चूहों पर रिसर्च किया। छह चूहों को 0.15 मिलीग्राम बेल के पत्ते के चूर्ण का घोल बनाकर पिलाया . दसवें दिन देखा गया कि उसमें स्पर्म ...

मत्स्यकन्या अर्थात जलपरी का रहस्य ! मिथक, कहानी और सच

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                ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।   मत्स्यकन्या अर्थात जलपरी का रहस्य ! मिथक, कहानी और सच जलीय जीव “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरी” का रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान आज का जो हमारा लेख है वो बड़ा ही रोचक है क्यूंकि आज मै आपको “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरियों” से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य बताने वाला हूँ। “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरियां” आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य हैं. “मत्स्यकन्या” या “जलपरी” यह शब्‍द ही अपने आप में बहुत ही रोमांच और रहस्‍य का अनुभव करवाने वाला है। “मत्स्यकन्या”(जलपरी) को अंग्रेजी में “Mermaid” कहते हैं। फ्रेंच शब्द मर याने ‘सागर’ और मेड यानी स्त्री या युवा लड़की से बना है।”मत्स्यकन्या” एक मिथकीय जलीय जीव है जिसका सिर एवं धड़ औरत का होता है और निचले भाग में पैरों के स्थान पर मछली की दुम होती है। जलपरियां कईं कहानियों व दंत कथाओं में पाई जाती है। “मत्स्यकन्या” की कल्‍पना करते ही मन फिल्मो, टीवी कार्टूनों,कहानियों और उपन्‍यासों के संसार में पहुंच जाता है,जिन्‍हें हमने अपने बचपन से लेकन आज तक देखा,सुना और पढ़ा है। सोशल मीडिया...

प्रेमावतार नीम करौरी बाबा/हनुमान जी के परम भक्त

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।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। हनुमान जी के परम भक्त प्रेमावतार नीम करौरी बाबा नीम करौरी बाबा एक महान हनुमान भक्त संत थे.बहुत से लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते है. प्यार से लोग उन्हें महाराज जी के नाम से भी भी पुकारते हैं.मान्यता है कि नीम करौरी बाबा को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थी. हालांकि वह आडंबरों से दूर रहते थे.न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला. एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे.यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे. प्रेमावतार नीम करौरी बाबा जी का जन्म हनुमान जी के परम भक्त महाराज श्री नीम करौरी बाबा जी का जन्म सन 1900 के आस पास उत्तर- प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर नमक ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.नीम करौरी महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रशाद शर्मा था.नीम करौरी बाबा जी के बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. अकबरपुर के किरहीन गांव में ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा- दीक्षा हुई. मात्र 11 वर्ष कि उम्र में ही लक्ष्मी नारायण शर्मा का वि...