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श्री आदि शंकराचार्य जी ने श्री राममन्दिर में लिए किया ही क्या था?

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               ।।🚩ॐ श्री गुरुदेवाय नमः🚩।। (#सोमवार१८पौष१९४५शाके) #श्रीराममंदिर_आंदोलन_का_सत्य #राम_मंदिर_के_आंदोलन_में_मोदी_योगी_एवं_चंपतराय_का_क्या_योगदान_रहा। #धैर्यपूर्वक_लेख_पढ़े।  #सत्य_के_पक्षधर_हिन्दू_अवश्य_पढ़ें। #राजनेताओं_के_गुलाम_नकली_हिन्द_न_पढ़ें नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत् । किमावरीवः कुह कस्य शर्मन्नम्भः किमासीद्गहनं गभीरम् ॥   अर्थ: उस समय अर्थात् सृष्टि की उत्पत्ति से पहले प्रलय दशा में असत् अर्थात् अभावात्मक तत्त्व नहीं था। सत् भाव तत्त्व भी नहीं था, रजःस्वर्गलोक मृत्युलोक और पाताल लोक नहीं थे, अन्तरिक्ष नहीं था और उससे परे जो कुछ है वह भी नहीं था, वह आवरण करने वाला तत्त्व कहाँ था और किसके संरक्षण में था। उस समय गहन कठिनाई से प्रवेश करने योग्य गहरा क्या था, अर्थात् वे सब नहीं थे।   ऋग्वेद के दशम मंडल के नासदीय सूक्त के उपरोक्त मंत्र से इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विश्व के सबसे वृहद् निर्णय (८,८००पृष्ठ) का श्रीगणेश किया।  रामलला के भव्य मंदिर का शिलान्यास राष्ट्रिय दिनांक १४श्...

आज भी चिरंजीवी हनुमान जी सशरीर धरती पर मौजूद हैं।

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                  ।। ⛳ ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  आज भी चिरंजीवी हनुमान जी सशरीर धरती पर मौजूद हैं। वे एक कल्प तक धरती पर ही रहेंगे। कहते हैं कि ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने हनुमान जी के साक्षात दर्शन किए थे। द्वापर में भीम और अर्जुन के के बाद कलयुग में निम्नलिखित 10 लोगों ने हनुमानजी के दर्शन किए थे। माधवाचार्यजी माधवाचार्यजी का जन्म 1238 ई. में हुआ था। माधवाचार्यजी प्रभु श्रीराम और हनुमानजी के परम भक्त थे। यही कारण था कि एक दिन उनको हनुमानजी के साक्षात दर्शन हुए थे। संत माधवाचार्य ने हनुमानजी को अपने आश्रम में देखने की बात बताई थी। श्री व्यास राय तीर्थ श्री व्यास राय तीर्थ का जन्म कर्नाटक में 1447 में कावेरी नदी के तट पर बन्नूर में हुआ था। विजयनगर के महान सम्राट श्री कृष्णदेवराय के गुरु श्री व्यास राय तीर्थ हनुमानजी के परम भक्त थे। उन्होंने देशभर में घुमकर देश की रक्षा के लिए 732 वीर हनुमान मंदिर स्थापित किए। उन्होंने श्री हनुमान पर प्रणव नादिराई, मुक्का प्राण पदिराई और सद्गुण चरित लिखा। तुलसीदासजी तुलसीदासजी का जन्म 1554 ईस्वी में श्रावण मा...

जानिए क्या है अपने सनातन वैदिक घड़ी का महत्व

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                 ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। आइए आपको वैदिक घड़ी के माध्यम से हिंदुत्व की जड़ों से जोड़ते है। ◆ 12:00 बजने के स्थान पर आदित्या: लिखा हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं : अंशुमान,अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु। ◆ 1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है, इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है : एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति। ◆ 2:00 बजने की स्थान पर अश्विनौ लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं। ◆ 3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं : सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण। ◆ 4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेदा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं : ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ◆ 5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं :  अपान, समान, प्राण, उदान और व्यान। ◆ 6:00 बजने के स्थान पर षड्र्सा: लिखा हुआ है,...

डीआरडीओ ने इंसानी सैनिकों की तरह रोबोट सोल्जर का किया निर्माण

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                   ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  डीआरडीओ ने इंसानी सैनिकों की तरह रोबोट सोल्जर का किया निर्माण डीआरडीओ का स्पेशल प्रोजेक्ट भारत सरकार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर विषम परिस्थितियों में इंसानी नुकसान को ‘शून्य’ तक लाने में जुटी है । इसके लिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानि डीआरडीओ एक स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। उनमें से एक प्रोजेक्ट ‘रोबोट सोल्जर’ है। जी हाँ डीआरडीओ स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत रोबोट सोल्जर तैयार कर रहा है। जिसका मॉडल डिफेंस एक्सपो में लगाया गया है। इंसानों की शक्ल में ये रोबोट एक सोल्जर की तरह ऑपरेशंस में हिस्सा लेंगे। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पांच फरवरी से चल रहे 11वें डिफेंस एक्सपो-2020 में भारत की सामरिक शक्ति का प्रदर्शन हो रहा है। यहां मेले में ऐसे-ऐसे आत्याधुनिक हथियार हैं, जो कई किमी दूर बैठे दुश्मनों को धूल चटा सकते हैं। जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के जवानों के बलिदान म...

चमगादड़ जैसा ड्रोन.वजन मात्र 93 ग्राम.जो करेगा फसलों की सुरक्षा

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                ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।  चमगादड़ जैसा ड्रोन.वजन मात्र 93 ग्राम.जो करेगा फसलों की सुरक्षा चमगादड़ जैसा ड्रोन.वजन मात्र 93 ग्राम.जो करेगा फसलों की सुरक्षा हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर से प्रेरित होकर ड्रोन को बनाया गया है. बोस्टन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने चमगादड़ जैसा ड्रोन वजन मात्र 93 ग्राम को बनाया है. जो चमगादड़ से मिलता जुलता है. यह अल्ट्रा लाइट ड्रोन उड़ने वाले पक्षी के तरह अपने पंखों फड़फड़ाता है. यह ड्रोन मौसमका हाल बतायेगा.जो करेगा फसलों की सुरक्षा. यह आपातकालीन परिस्थिति में सर्च,रेस्क्यू और निगरानी करने में भी काम आ सकता है. चमगादड़ जैसा ड्रोन उड़ता हुआ robot मानव रहित विमान को ड्रोन (Drone) कहा जाता है. विविध आकार-प्रकार और विविध कार्यों के लिए इसका प्रयोग किया जाता है. इसे सुदूर स्थान से नियंत्रित किया जाता है. वास्तव में यह एक उड़ता हुआ robot ही है. जिसे इंसान विविध कार्यों के लिए remote control द्वारा इसे नियंत्रित करता है. ड्रोन की विशेषतायें चमगादड़ जैसा ड्रोन की इस विशेषता के कारण ही यह टोही विमान के रूप में अत्...

बेल के पत्ते में छिपा है जनसंख्या नियंत्रण का राज, यह एंटी ऑक्सीडेंट हैं

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  ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।   बेल के पत्ते में छिपा है जनसंख्या नियंत्रण का राज भागलपुर .अगर आप बिना किसी परेशानी के बच्चा नहीं चाहते हैं तो आपको बेल के पत्ते (वुड एपल) का नियमित सेवन करना होगा. जब तक आप बेल के पत्ते का सेवन करेंगे, तब तक बच्चा नहीं होगा. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के जंतु विज्ञान विभाग के वरीय शिक्षक प्रो. विभूति नारायण सिंह ने बेल के पत्ते पर शोध किया है. प्रो. सिंह का कहना है कि पुरुष जब तक बेल के पत्ते के चूर्ण का सेवन करेगा तब तक बच्चा नहीं होगा. जब बच्चे की इच्छा हो तब चूर्ण का सेवन करना बंद कर दे.यह शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल में प्रकाशित भी हो चुका है. शोध को मान्यता भी मिल गई है. प्रो. सिंह के साथ राजेश कुमार ने भी काम किया है.अभी तक पुरुष जनसंख्या नियंत्रण के लिए कंडोम या फिर नसबंदी का सहारा लेते रहे हैं. बेल के पत्ते के चूर्ण का घोल बनाकर चूहों पर किया सफल प्रयोग प्रोफेसर सिंह ने 12 चूहों पर रिसर्च किया। छह चूहों को 0.15 मिलीग्राम बेल के पत्ते के चूर्ण का घोल बनाकर पिलाया . दसवें दिन देखा गया कि उसमें स्पर्म ...

मत्स्यकन्या अर्थात जलपरी का रहस्य ! मिथक, कहानी और सच

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                ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।   मत्स्यकन्या अर्थात जलपरी का रहस्य ! मिथक, कहानी और सच जलीय जीव “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरी” का रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान आज का जो हमारा लेख है वो बड़ा ही रोचक है क्यूंकि आज मै आपको “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरियों” से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य बताने वाला हूँ। “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरियां” आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य हैं. “मत्स्यकन्या” या “जलपरी” यह शब्‍द ही अपने आप में बहुत ही रोमांच और रहस्‍य का अनुभव करवाने वाला है। “मत्स्यकन्या”(जलपरी) को अंग्रेजी में “Mermaid” कहते हैं। फ्रेंच शब्द मर याने ‘सागर’ और मेड यानी स्त्री या युवा लड़की से बना है।”मत्स्यकन्या” एक मिथकीय जलीय जीव है जिसका सिर एवं धड़ औरत का होता है और निचले भाग में पैरों के स्थान पर मछली की दुम होती है। जलपरियां कईं कहानियों व दंत कथाओं में पाई जाती है। “मत्स्यकन्या” की कल्‍पना करते ही मन फिल्मो, टीवी कार्टूनों,कहानियों और उपन्‍यासों के संसार में पहुंच जाता है,जिन्‍हें हमने अपने बचपन से लेकन आज तक देखा,सुना और पढ़ा है। सोशल मीडिया...