मत्स्यकन्या अर्थात जलपरी का रहस्य ! मिथक, कहानी और सच
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मत्स्यकन्या अर्थात जलपरी का रहस्य ! मिथक, कहानी और सच
जलीय जीव “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरी” का रहस्य जानकर आप रह जाएंगे हैरान
आज का जो हमारा लेख है वो बड़ा ही रोचक है क्यूंकि आज मै आपको “मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरियों” से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य बताने वाला हूँ।
“मत्स्यकन्या” अर्थात “जलपरियां” आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य हैं. “मत्स्यकन्या” या “जलपरी” यह शब्द ही अपने आप में बहुत ही रोमांच और रहस्य का अनुभव करवाने वाला है। “मत्स्यकन्या”(जलपरी) को अंग्रेजी में “Mermaid” कहते हैं। फ्रेंच शब्द मर याने ‘सागर’ और मेड यानी स्त्री या युवा लड़की से बना है।”मत्स्यकन्या” एक मिथकीय जलीय जीव है जिसका सिर एवं धड़ औरत का होता है और निचले भाग में पैरों के स्थान पर मछली की दुम होती है। जलपरियां कईं कहानियों व दंत कथाओं में पाई जाती है।
“मत्स्यकन्या” की कल्पना करते ही मन फिल्मो, टीवी कार्टूनों,कहानियों और उपन्यासों के संसार में पहुंच जाता है,जिन्हें हमने अपने बचपन से लेकन आज तक देखा,सुना और पढ़ा है। सोशल मीडिया साइट्स और YouTube में आपको ऐसे बहुत से जलपरी फोटो और जलपरी वीडियो मिल जायेंगे जो आपको वास्तविक लगते हैं। लेकिन मन में यह सवाल तब भी उठता था और आज भी उठता है कि क्या वाकई में जलपरी होती हैं ? या पहले कभी हुई हैं ! क्या वाकई में उनका कोई अस्तित्व कभी रहा है ?
हालांकि अभी तक जलपरी के मिलने की आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन पौराणिक कथाओं में जलपरी से जुड़ी घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि जलपरी शायद कभी इस धरती का हिस्सा थीं।
सांस्कृतिक तौर पर जलपरियां बिना कपडों के बताई गई है पर सेंसरशिप के चलते, जो अधिकतर फ़िल्मों में विवाद का विषय होता है, यह प्रयास किया जाता है कि जलपरियों के लम्बे बाल उनके शरीर को ढक लें। जहां सेंसरशिप की कड़ी शर्तें लागू होती है वहां जलपरियां विभिन्न प्रकार की जल सामग्री, जैसें सिपियां या पौधों, से बने कपड़े पहनी हुई दिखाई जाती है।
जलपरियों के देखे जाने के दावें कईं बार किए गए हैं जिसमे जावा से लेकर ब्रिटिश कोलंबिया तक के लोग शामिल है । कई लोगों ने जलपरियों को देखने का दावा किया है। यही नहीं इनके शव और अवशेष की तस्वीरें भी लोगों के बीच वायरल हुई हैं । आइए जानते हैं जलपरी के अस्तित्व से जुड़ी ये रोचक बातें…
“मत्स्यकन्या” की भारतीय कहानियां –
भारतीय दंत कथाओं में – सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान “विष्णु” के मत्स्यावतार का उल्लेख है जिनके शरीर का उपरी भाग मानव का व निछला भाग मछली का है।
भारतीय रामायण के थाई व कम्बोडियाई संस्करणों में भी “मत्स्यकन्या” का जिक्र किया गया है। रावण की बेटी “सुवर्णमछा” (सोने की जल परी) का उल्लेख किया गया है। जिसका आधा शरीर कन्या का और आधा मछली जैसा था। कथा है कि जब हनुमान जी भगवान श्री रामजी के लिए लंका जाने के लिए सेतु का निर्माण कर रहे थे तब “स्वर्णमछा” वानर सेना को परेशान करती थी।”स्वर्णमछा” चुपके से कतार में रखे पत्थरों को बिगाड़ देती थी, जिनसे श्रीराम-सेतु का निर्माण किया जा रहा था
महाभारत में “मत्स्यगंधा” का जिक्र आया है जिनका विवाह “शांतनु” से हुआ था। इनके पुत्र ही महर्षि “वेदव्यास” हुए थे। इनके जन्म के विषय में भी कथा मिलती है कि इनका जन्म एक मत्स्य कन्या से हुआ था जो एक अप्सरा थी और शाप के कारण मछली बन गई थीं।
महाभारत के अनुसार ही – “अर्जुन” की चौथी पत्नी का नाम जलपरी नागकन्या “उलूपी” था। उन्हीं ने अर्जुन को जल में अनुकुलित ( हानिरहित) रहने का वरदान दिया था। महाभारत युद्ध में “भीष्म पितामह” को मारने के बाद ब्रह्मा-पुत्र से शापित होने पर उलूपी ने ही अर्जुन को शापमुक्त भी किया था और अपने सौतेले पुत्र “बभ्रुवाहन” के हाथों मारे जाने पर उलूपी ने ही अर्जुन को पुनर्जीवित भी कर दिया था। विष्णु पुराण के अनुसार अर्जुन से उलूपी ने “इरावन” नामक पुत्र को जन्म दिया। इसी “इरावन” को भारत के सभी हिजड़े अपना देवता मानते हैं। उलूपी अर्जुन के सदेह स्वर्गारोहण के समय तक उनके साथ थी।
अन्य देशों की लोककथाओं में भी मत्स्यकन्या –
“जलपरियां” दुनिया की कई संस्कृतियों की लोक कथाओं में पायी जाती है जिसमे भारत ही नहीं यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कुछ देशों के कहानी, किस्सों में भी जलपरी जैसे कई पात्र मिलते हैं। जलपरी का जिक्र कहानियों में अक्सर नायिका के रूप में होता है। ये कहानियां अक्सर प्रेम, परोपकार और मनुष्य को वरदान देने से जुड़ी होती हैं। जलपरियों को कई बार बाढ़, तूफ़ान और समुद्री ज़हाजों के डूबने जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के साथ जोड़ा जाता है. हालांकि जलपरी का रहस्य आज भी पूर्ण रूप से खुल नहीं पाया है।
विदेशों में मत्स्यकन्या अर्थात् जलपरियों की सबसे पहली कहानी-
असायरिया में 1000 ईसा पूर्व पाई गई है। देवी अटार्गेटिस, जो असायरियन और रानी सेमिरमिस की माँ थी, एक चरवाहे से बेहद प्यार करती थी पर ना चाहते हुए भी उसे उसको मारना पडा। इस बात से शर्मिंदा होकर उसने तलाब में छलांग लगा दी और एक मछली का रूप ले लिया, परन्तू पानी भी उसकी सुंदरता को छिपा न सका। इस कारण उसने एक जलपरी का रूप ले लिया। ग्रीक कहानियों में अटार्गेटिस को डेरकेटो माना जाता है।
एक लोकप्रिय ग्रीक कहानी के अनुसार महान अलेक्सैंडर की बहन थेसालॉयनिक मरने के बाद एक जलपरी बन गई। जलपरी के रूप में वह ज़िंदा रही और उधर से गुजरने वाली हर एक जहाज़ के नाविकों से एक ही सवाल पूछती – “क्या महान अलेक्सैंडर जीवित है”(यूनानी : “Ζει ο Βασιλιάς Αλέξανδρος;”), जिसका सही जवाब था: “वह जीवित है और विश्व पर राज करता है” (Greek: “Ζει και βασιλεύει και τον κόσμο κυριεύει”)। इस जवाब से वह बेहद खुश होती और पानी को शांत करके जहाज़ को जाने देती । यदि दुसरा कोई जवाब मिलता तो वह गुस्से में आकर समुंदर में तुफ़ान व बवंडर ला कर जहाज़ को डुबो देती थी।
पुरानी चीनी कहानियों में जलपरियां एक खास जीव थी जिनके आंसू मोतियों में बदल जाते थे। इन करणों के चलते मछुआरे उन्हे पकड़ने का निरंतर प्रयास करते थे परन्तु जलपरियां अपने गानों से उन्हे पानी की गहराइयों में खींच लेती थी।
“मत्स्यकन्या” और जलमानव, 1866.
बेनाम रुसी दंतकथा में चित्रित कहानियों के अनुसार जलपरियां मधुर धुन में गाना गा कर इंसानों या देवताओं को अपनी ओर आकर्षित करती है जिससे उनका ध्यान भटक जाता है। उनके इस बरताव के कारण कईं इंसान जहाज़ से समुंदर में कूद जाते है या पूरा जहाज़ ही ले डूबते हैं।
कुछ कहानियों में जलपरियां डूबते हुए इंसानों की मदद करने के प्रयास में उनकी जान भी ले लेती है। यह भी कहा जाता है कि वे इंसानों को अपने जलमग्न विश्व में लेकर जाती है। हांस क्रिश्चन की द लिटल मर्मेड में यह कहा गया है कि जलपरियां यह भुल जाती है कि इंसान पानी के भीतर सांस नहीं ले सकते हैं, कुछ कहानियों के अनुसार वे इंसानों को जानबूझ कर डुबो देती है। जलपरियों का गाना उनके लिए श्राप माना जाता है।
द लैंड बेबी, जॉन कोलियर द्वारा –
वन थाउसंड ऐंड वन नाइट्स में ऐसी कईं कहानियां है जिनमें जलमानवों की कहानियों का ज़िक्र है। अन्य कहानियों के विपरीत यह इंसानो से मिलते जुलते है लेकिन पानी में रहने और सांस लेने की काबिलियत रखते हैं। वे इंसानो के साथ संयोग भी करते है और ऐसे मिलन से जन्में बच्चे पानी में भी जीवित रह सकते हैं।
समाचारों में जलपरी –
सन 2012 को Animal Planet channel के डाक्यूमेंट्री फुटेज से सबके मन में एक ही सवाल उठ रहे हैं की सच में जलपरी होती हैं क्या? उस डाक्यूमेंट्री का नाम था “Mermaids- The Body Found” जिसके अनुसार कुछ लोग पानी के अन्दर गहराई में रहने वाले जीव का पता लगा रहे थे। जिसमे एक अलग तरीके का जीव भी दिखा जिसका शारीर इंसानों की तरह था । उसकी झलक विडियो रिकॉर्डिंग में कैद की गयी जिससे “जलपरी” के होने का दावा किया गया । इन्टरनेट पर इस विडियो को real mermaid नाम से पहचान मिली।
कुछ साल पहले भी ऐसी खबरें आई थी की भारत के गुजरात के तट पर जलपरी का मृत शव मिला है। इस खबर से पुरे भारत में सनसनी फ़ैल गयी थी। इसकी तस्वीरें और विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। यही नहीं हवाई और मिश्र के समुद्री तट पर भी एक दम वैसी ही जलपरी का शव दिखने की खबर आई थी। असल में यह सब एक अफवाह थी।
सोशल मीडिया पर जिस जलपरी की तस्वीर वायरल हो रही थी वो दरअसल मशहूर आर्टिस्ट जोएल हर्लो ने फिल्म Pirates of The Caribbean के लिए एक प्रॉप के तौर पर बनाई थी। ये दिखने में बिलकुल वास्तविक लग रहीं थी। इसी ग़लतफहमी में कई लोगों ने इस तस्वीर को वायरल कर के ये अफवाहें फैला दी थी की गुजरात या अन्य जगहों पर जलपरी देखी गई.
वास्तविक जलपरी का रहस्य –
वर्ष 2016 में भारत में एक अनोखी घटना सामने आई जिसमे उत्तर प्रदेश में एक बच्चे का जन्म हुआ जो की जलपरी जैसा दीखता था. पर दुर्भाग्यवश यह बच्चा केवल 10 मिनट के लिए ही जीवित रह पाया था. जो हालत इस बच्चे की थी इसे विज्ञान द्वारा Sirenomelia कहा जाता है और इसे mermaid syndrome के नाम से भी जाना जाता है। डॉक्टर वंदना आर्य जिन्होंने इस बच्चे की डिलीवरी करी थी उन्होंने कहा की उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में पहली बार ऐसा केस देखा है और ये ही नहीं उस बच्चे के हाथ भी जालीदार थे जैसा की पानी में रहने वाले जीवों के होते हैं. ऐसा भारत में पहली बार देखा गया था।
दूसरी घटना पश्चिम बंगाल का है। दरअसल कोलकाता के एक अस्पताल में अपनी तरह की ये दुर्लभ मामला देखने को मिला । कुछ दिनों पहले इस अस्पताल में एक बच्चे ने ‘जलपरी’ के रूप में जन्म लिया। इस बच्चे को देखकर डॉक्टरर्स भी हैरान है और कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं है।
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ी लिंडसे फिट्स हैरिस बताती हैं की ये एक मेडिकल कंडीशन है जो की एक लाख बच्चे में किसी एक को होती है. इस बीमारी में किसी नवजात के पैर निचे से चिपके होते हैं. इसके पीछे की वजह है की जब गर्भ में विकास के दौरान माँ की गर्भनाल दो धमनियां बनाने में असफल हो जाती है तो बच्चे के पैर अलग नहीं हो पाते हैं. वो शारीर के किसी और अंग की ही तरह चिपके हुए बढ़ते हैं. जिसे देखकर ऐसा आभास होता है की जैसे उनके पैर किसी जलपरी की तरह हों, लेकिन वो एक मेडिकल कंडीशन होता है.
विज्ञान और जलपरी –
विज्ञान भी जलपरी के अस्तित्व को नहीं ठुकराता है। कई वैज्ञानिकों का मानना है कि विकास के क्रम में संभावना है कि मनुष्य ने पानी में रहने के लिए भी अपने अंगों को विकसित कर लिया हो और यह रूप जलपरी के रूप में सामने आया हो। आधुनिक युग में जलपरियां समुंदर और लुटेरों की कहानियों में पाई जाती है और कईं बार इन्हे जलगाय, जिन्हे मैनेटी कहते है, के रूप में देखा जाता है। नाविक इन जीवों को दूर से देख कर उन्हे जलपरी समझ बैठते है।

अमेरिका में “मत्स्यकन्या” समुदाय “Merfolk”
किसी ने सच ही कहा है कि शौक बड़ी चीज है क्योंकि अपने शौक के चक्कर में लोग क्या-क्या नहीं कर जाते हैं. इसी का उदाहरण हैं अमेरिका में जलपरी बनने का शौक रखने वालों का एक विशेष गुप्त समुदाय (Secret community) है जिसमें लड़कियां ही नहीं, लड़के भी बन जाते हैं जलपरी। अमेरिका की एक ऐसी सीक्रेट कम्यूनिटी के लोग आम लोगों कि तरह नहीं, बल्कि जलपरी जैसा जीवन जीते हैं. अमेरिका में इस समुदाय के लोगों को ‘Merfolk’ कहा जाता है।
यह कम्युनिटी अमेरिका में बहुत ही तेज़ी से बढ़ रही है और इस कम्युनिटी के लोग आधे इंसान की तरह और आधे जलपरी की तरह दिखते हैं । इन लोगों को जलपरी बनने का इतना जूनून है कि ये एक-एक साल अपनी जलपरी जैसी पोशाक बनाने में लगा देते हैं । इतना ही नहीं ये लोग इस पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। इसके साथ ही ये लोग पूरी दुनिया में जलपरियों में रुचि रखने वाले लोगों से मिलते हैं और उन्हें ट्रेनिंग भी देते हैं।
अमेरिका के Seattle में एक अलग ही है इन जलपरियों की सीक्रेट दुनिया। यहां रियल लाइफ जलपरियां सिलिकॉन का “पुँछ” पहनती हैं वो Mer-conventions भी अटेंड करती हैं। साथ ही वो पानी में भी रहती हैं। इनका अपना एक अलग मरनेटवर्क है, जो कि वास्तविक में एक फोरम है, जिसके माध्यम से समुह के सभी लोग अलग-अलग सम्मेलनों में पार्टिसिपेट कर सकें. इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी यह नेटवर्क बहुत एक्टिव है और इनके बहुत सारे फॉलोअर्स भी हैं । Seattle में ये समुदाय बहुत ही प्रचलित है।
हालांकि आज के युग में जलपरी का पृथ्वी पर कोई अस्तित्व नहीं है। लेकिन इस बात को भी नहीं झुठलाया जा सकता है कि जलपरी कभी धरती पर हुआ करती थीं।
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