प्रेमावतार नीम करौरी बाबा/हनुमान जी के परम भक्त
।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।।
हनुमान जी के परम भक्त प्रेमावतार नीम करौरी बाबा
प्रेमावतार नीम करौरी बाबा जी का जन्म
हनुमान जी के परम भक्त महाराज श्री नीम करौरी बाबा जी का जन्म सन 1900 के आस पास उत्तर- प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर नमक ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.नीम करौरी महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रशाद शर्मा था.नीम करौरी बाबा जी के बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. अकबरपुर के किरहीन गांव में ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा- दीक्षा हुई. मात्र 11 वर्ष कि उम्र में ही लक्ष्मी नारायण शर्मा का विवाह हो गया था परन्तु जल्दी ही उन्होंने घर छोड़ दिया और लगभग 10 वर्ष तक घर से दूर रहे.
हनुमान जी के परम भक्त प्रेमावतार नीम करौरी बाबा के चमत्कार
कहते है कि गृह- त्याग के बाद,जब वो अनेक स्थानों के भ्रमण पर थे तभी एक बार महाराज जी एक स्टेशन से ट्रेन किसी वजह से बिना टिकट के ही चढ़ गए. और प्रथम श्रेणी में जाकर बैठ गए. गाड़ी कुछ दूर ही चली थी कि एक एंग्लो इण्डियन टिकट निरीक्षक वहाँ आया. उसने बहुत कम कपड़े पहने, अस्त-व्यस्त बाल वाले बिना टिकट बाबा को देखा तो क्रोधित होकर अण्ट-सण्ट बकने लगा.बाबा अपनी मस्ती में चूर थे. अतः वह चुप रहे.
कुछ देर बाद गाड़ी नीम करौरी नामक छोटे स्टेशन पर रुकी.टिकट निरीक्षक ने बाबा को अपमानित करते हुए वहीं उतार दिया. तब नीम करौरी बाबा ने वहीं अपना चिमटा गाड़ दिया और शान्त भाव से बैठ गये.गार्ड ने झण्डी हिलाई; पर गाड़ी बढ़ी ही नहीं. पूरी भाप देने पर पहिये अपने स्थान पर ही घूम गये. इंजन की जाँच की गयी, तो वह एकदम ठीक था. अब तो चालक, गार्ड और टिकट निरीक्षक के माथे पर पसीना आ गया. कुछ यात्रियों ने टिकट निरीक्षक से कहा कि बाबा को चढ़ा लो, तब शायद गाड़ी चल पड़े.
इसी बीच एक अधिकारी वहां पहुंचे और उन्होंने ट्रेन को अनियत स्थान पर रोके जाने का कारण जानना चाहा तो कर्मचारियों ने पास में ही बैठे हुये नीम करौरी बाबा को इंगित करते हुये कारण अधिकारी को बता दिया. वो अधिकारी महाराज जी और उनकी दिव्यता से परिचित था.अतः मरता क्या न करता, उसने बाबा से क्षमा माँगी और गाड़ी में बैठने का अनुरोध किया.इस पर बाबा ने इंकार कर दिया परन्तु जब अन्य सहयात्रियों ने भी महाराज जी से बैठ जाने का आग्रह किया तो महाराज जी ने दो शर्ते रखी. एक कि उस स्थान पर ट्रेन स्टेशन बनाया जायेगा, दूसरा कि साधु सन्यासियों के साथ भविष्य में ऐसा वर्ताव नहीं किया जायेगा.रेलवे के अधिकारिओं ने दोनो शर्तों के लिए हामी भर दी तो महाराज जी ट्रेन में चढ़ गए और ट्रेन चल पड़ी. इस घटना से बाबा के साथ वह नीम करौरी गाँव भी प्रसिद्ध हो गया.
बाद में रेलवे ने उस गांव में एक स्टेशन बनाया.कुछ समय बाद महाराज जी उस गांव में आये और कई साल तक उस गाँव में रहे. तभी से लोग उन्हें नीम करौरी वाले बाबा (Neeb Karori Baba) या नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba)के नाम से जानने लगे कहा जाता है कि और उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में ज्ञान प्राप्त कर लिया था.
एक दिन उनके पिता को किसी ने उनकी खबर दे दी, पिता उनसे मिले और गृहस्थ जीवन का पालन करने का आदेश दिया. पिता के आदेश को तुरंत मानते हुये वो घर वापस लौट आये और पुनः गृहस्थ जीवन आरम्भ कर दिया.गृहस्थ जीवन के साथ- साथ सामाजिक और धार्मिक कार्यों में वो बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे.बाद में वो दो बेटों एवं एक बेटी के पिता भी बन गए, परन्तु घर गृहस्थी में लम्बे समय तक उनका मन नहीं रमा और कुछ समय बाद उन्होंने फिर से गृह त्याग कर दिया.
गृह त्याग एवं तपस्या
घर-बार त्याग कर वो अलग- अलग जगह घूमने लगे .इसी भ्रमण के दौरान उनको हांड़ी वाला बाबा, लक्ष्मण दास, तिकोनिया वाला बाबा आदि नामों से जाना जाना गया. नीम करोली बाबा जी ने गुजरात के बवानिया मोरबी में साधना की और वहां वो तलैयां वाला बाबा के नाम से विख्यात हो गए. वृंदावन में महाराज जी, चमत्कारी बाबा के नाम से जाने गये.
नीम करौरी बाबा का कैंची धाम
बाबा ने अपना मुख्य आश्रम नैनीताल (उत्तरांचल) की सुरम्य घाटी में कैंची ग्राम में बनाया.यहाँ बनी रामकुटी में वे प्रायः एक काला कम्बल ओढ़े भक्तों से मिलते थे. बाबा नीब करौरी को कैंची धाम बहुत प्रिय था. अक्सर गर्मियों में वे यहीं आकर रहते थे. बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया.उस मन्दिर में हनुमान जी की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं.
बाबा नीब करौरी के इस पावन धाम को लेकर तमाम तरह के चमत्कार जुड़े हैं. जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई थी. बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया. उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया. ऐसे ही एक बार बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए उसे बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुचवाया. ऐसे न जाने कितने किस्से बाबा और उनके पावन धाम से जुड़े हुए हैं, जिन्हें सुनकर लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं.हनुमान जी के परम भक्त नीम करोली बाबा जी के दरबार कैंची धाम आश्रम एवं वृंदावन आश्रम में हमेशा भक्तों का ताँता लगा रहता है. लोगों का कहना है कि दरबार में आकर उनकी मनोकामना पूरी होती है और महाराज कभी भी किसी भक्त को निराश नहीं छोड़ते.
बाबा ने देश भर में 12 प्रमुख मन्दिर बनवाये.उनके देहान्त के बाद भी भक्तों ने 09 मन्दिर बनवाये हैं. इनमें मुख्यतः हनुमान् जी की प्रतिमा है.बाबा चमत्कारी पुरुष थे. अचानक गायब या प्रकट होना, भक्तों की कठिनाई को भाँप कर उसे समय से पहले ही ठीक कर देना, इच्छानुसार शरीर को मोटा या पतला करना..आदि कई चमत्कारों की चर्चा उनके भक्त करते हैं.बाबा का प्रभाव इतना था कि जब वे कहीं मन्दिर स्थापना या भण्डारे आदि का आयोजन करते थे, तो न जाने कहाँ से दान और सहयोग देने वाले उमड़ पड़ते थे और वह कार्य भली भाँति सम्पन्न हो जाता था.
नीम करोली बाबा की महासमाधि
जब बाबा को लगा कि उन्हें शरीर छोड़ देना चाहिए, तो उन्होंने भक्तों को इसका संकेत कर दिया. इतना ही नहीं उन्होंने अपने समाधि स्थल का भी चयन कर लिया था. ह्रदय में दर्द की शिकायत के बाद जरुरी चिकित्सा जाँच के लिए 09 सितम्बर,1973 को वे आगरा के लिए चले. वे एक काँपी पर हर दिन रामनाम लिखते थे.जाते समय उन्होंने वह कापी आश्रम की प्रमुख श्रीमाँ को सौंप दी और कहा कि अब तुम ही इसमें लिखना.उन्होंने अपना थर्मस भी रेल से बाहर फेंक दिया. गंगाजली यह कह कर रिक्शा वाले को दे दी कि किसी वस्तु से मोह नहीं करना चाहिए. नीम करोली बाबा जी आगरा से वापस कैंची धाम आ रहे थे जहां वो गए थे, इसी बीच मथुरा स्टेशन पर पुनः दर्द होने के कारण उन्होंने अपने शिष्यों को वृंदावन आश्रम वापस चलने के लिए कहा और अचेत हो गये.तबियत ज्यादा ख़राब होने कि वजह से शिष्यों ने उन्हें शीघ्रता से उन्हें रामकृष्ण मिशन अस्पताल, वृन्दावन में पहुँचाया. जहाँ आकस्मिक चिकिस्ता सेवा कक्ष में बाबा को भर्ती करा दिया गया.
वहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें कुछ इंजेक्शन दिए और आक्सीजन मास्क लगा दिया.कुछ ही देर में महाराज जी वापस बैठ गए और आक्सीजन मास्क को उतार कर कहा “बेकार” कि “अब ये सब बेकार है” और महाराज जी धीरे- धीरे कई बार “जय जगदीश हरे” पुकारते हुये 11 सितम्बर 1973 को 01 बजकर 15 मिनट के समय बहुत ही शांति के साथ ब्रह्म में लीन हो गए .
बाबा की समाधि वृन्दावन में तो है ही; पर कैंची, नीब करौरी, वीरापुरम (चेन्नई) और लखनऊ में भी उनके अस्थि कलशों को भू समाधि दी गयी. उनके लाखों देशी एवं विदेशी भक्त हर दिन इन मन्दिरों एवं समाधि स्थलों पर जाकर बाबा का अदृश्य आशीर्वाद ग्रहण करते हैं.
कैंची धाम आश्रम
अपने जीवन- काल में नीम करौली बाबा जी ने अनेकों स्थानों का भ्रमण किया. महाराज ने 100 से भी अधिक मंदिरों और आश्रमों का निर्माण करवाया था, जिसमे से वृंदावन और कैंची धाम आश्रम मुख्य है.कैंची धाम आश्रम में नीम करौली बाबा जी अपने जीवन के अंतिम दशक में सबसे ज्यादा रहे, इस आश्रम का निर्माण 1964 में करवाया गया था.बाबा 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया था.
आरम्भ में यह स्थान दो स्थानीय साधुओं,श्री प्रेमी बाबा और श्री सोमवारी महाराज के लिए यज्ञ हेतु बनवाया गया था,साथ ही यहाँ एक हनुमान मंदिर कि स्थापना भी उसी समय पर की गई .यहां बाबा नीब करौरी जी की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है .कैंची धाम को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला व्यक्ति कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता .यहां पर मांगी गयी मनौती पूर्णतया फलदायी होती है.यही कारण है कि देश-विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं.
नीम करौरी बाबा महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं.इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम तथा अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है. कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल से लगभग 17 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा – नैनीताल रोड पर स्थित है. यह स्थान अत्यंत खूबसूरत एवं पहाड़ियों से घिरा हुआ है.कैंची धाम यात्रा के साथ ही आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल जैसे की अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम, गोलू-चितई मंदिर, चम्पावत के पूर्णागिरि मंदिर नानकमत्ता साहिब, रीठा साहिब आदि धार्मिक स्थानों के अलावा नैनीताल, रानीखेत जैसे खूबसूरत पर्यटक स्थलों की यात्रा का भी आनंद उठा सकते हैं.
आश्रम की स्थापना की वर्षगांठ के अवसर पर हर वर्ष 15 जून को यहां पर मेले का आयोजन होता है, जिसमे देश-विदेश से लाखो लोग हिस्सा लेते हैं.बाबा के इस पावन धाम में होने वाले नित-नये चमत्कारों को सुनकर दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं. बाबा के भक्त और जाने-माने लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है. इस पुस्तक में बाबा नीब करौरी के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है.
बाबा के भक्तों में एक आम आदमी से लेकर अरबपति-खरबपति तक शामिल हैं. नीम करौरी बाबा जी के अनुयायों का फैलाव सिर्फ भारतवर्ष में ही नहीं वरन यूरोप से लेकर अमेरिका तक है.बाबा श्री रामदास, श्री भगवान् दास ,माँ जया,श्री जय उत्त्कल,श्री कृष्णा दास उनके मुख्य शिष्य है.इनके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी बड़ी विदेशी हस्तियां बाबा के भक्त हैं जो बाबा जी के मंदिर आते रहे हैं.
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