डीआरडीओ ने इंसानी सैनिकों की तरह रोबोट सोल्जर का किया निर्माण

                   ।।⛳ॐ श्री गुरुदेवाय नमः⛳।। 

डीआरडीओ ने इंसानी सैनिकों की तरह रोबोट सोल्जर का किया निर्माण



डीआरडीओ का स्पेशल प्रोजेक्ट

भारत सरकार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर विषम परिस्थितियों में इंसानी नुकसान को ‘शून्य’ तक लाने में जुटी है । इसके लिए डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानि डीआरडीओ एक स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। उनमें से एक प्रोजेक्ट ‘रोबोट सोल्जर’ है। जी हाँ डीआरडीओ स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत रोबोट सोल्जर तैयार कर रहा है। जिसका मॉडल डिफेंस एक्सपो में लगाया गया है। इंसानों की शक्ल में ये रोबोट एक सोल्जर की तरह ऑपरेशंस में हिस्सा लेंगे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पांच फरवरी से चल रहे 11वें डिफेंस एक्सपो-2020 में भारत की सामरिक शक्ति का प्रदर्शन हो रहा है। यहां मेले में ऐसे-ऐसे आत्याधुनिक हथियार हैं, जो कई किमी दूर बैठे दुश्मनों को धूल चटा सकते हैं। जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के जवानों के बलिदान में 73 फीसदी की कमी आयी है।

डीआरडीओ का डिफेंस एक्सपो-2020

डिफेंस एक्सपो-2020 में शामिल डीआरडीओ के वैज्ञानिक मृदुकांत पाठक ने कहा- ये रोबोट सोल्जर एके-47 और इंसास जैसी रायफल से लैस होंगे, जोकि खुद ही छिपे आतंकियों को ढूंढकर उनको करीब से शूट करने में सक्षम होंगे। इन रोबोट सोल्जर के इस्तेमाल से एनकाउंटर के दौरान जवानों की जान को खतरे में डाले बिना आतंकियों का सफाया आसान होगा। बताया कि, यूएस आर्मी, साउथ कोरिया और इजराइल में इस तरह के मिलिट्री रोबोट के निर्माण का काम कई सालों से चल रहा है। जल्द ही इस कड़ी में भारत का नाम भी जुड़ जाएगा।

डीआरडीओ के ये घातक हथियार

डीआरडीओ ने एक्सपो में सूरन, हाइब्रीड बिहो, मीडियम टैंक के-21 जैसे आधुनिक हथियारों की लगाई प्रदर्शनी

सूरन:

एक मानवरहित टेली ऑपरेटेड कॉम्बैट व्हीकल है। इस व्हीकल और इसमें लगी गन को रिमोट, मोबाइल कंट्रोल स्टेशन और आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस निवाटा से कंट्रोल किया जा सकता है। इस 500 सीसी इंजन वाले व्हीकल में लंबी रेंज के कैमरे, प्रोसेसर्स, सेंसर, पॉवर बैकअप, इनबिल्ट जनरेटर लगे हैं।

हाइब्रीड बिहो:

यह कोरियन कंपनी का सेल्फ प्रोपेल्ड गन एयर डिफेंस सिस्टम है। यह 30 एमएम की दो गन से लैस है। इससे दुश्मनों के एयरक्राफ्ट को मार गिराने वाले गाइडेड मिसाइल भी लांच की जा सकती है। यह गन एक मिनट में 1200 राउंड फायर गोलियां कर सकती है।

मीडियम टैंक के 21-101:

कोरियन कंपनी का यह मीडियम टैंक 105 एमएम गन से लैस है। यह मीडियम टैंक पैदल सेना को कवर देने में अहम किरदार निभाता है। एंटी टैंक मिसाइल से लैस इसकी गन पांच किलोमीटर तक मार कर सकती है।

गौरतलब हो कि इन रोबोट सोल्जर के इस्तेमाल से एनकाउंटर के दौरान जवानों की जान को खतरे में डाले बिना आतंकियों का सफाया आसान होगा। इससे भारतीय जवानों की बलिदान में कमी आयेगी। बता दें यूएस आर्मी, साउथ कोरिया और इस्राइल में इस तरह के मिलिट्री रोबोट के निर्माण का काम कई सालों से चल रहा है। इस कड़ी में जल्द ही भारत का नाम भी जुड़ जायेगा। मोदी सरकार के नेतृत्‍व में यह भारत की बड़ी सफलता होगी।

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